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कटनी जिला 

ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि :- नगर कटनी का नाम यहां से बहने वाली कटनी नदी के नाम पर रखा गया है

। हालांकि इसका पुराना नाम मुड़वारा है । किंवदंती है कि बीना कटनी रेलमार्ग पर कटनी पहुंचने पर पड़ने

वाले मोड़ के कारण इसका नाम मुड़वारा है । दूसरी किंवदंती है कि अंग्रेजी हुकूमत के दौरान अस्पताल के

पास स्थित पेड़ पर अंग्रेज, व्यक्तियों को फांसी देने के बाद सिर काट कर लटका देते थे इस कारण इसका

नाम मुड़वारा पड़ा वहां दूसरी ओर यह भी कहा जाता है कि ग्राम कन्हवारा डिठवारा, नन्हवारा, परसवारा

जैसे बारह गांव जहां बाराह की प्रतिमा थी  इसके कारण इसका  नाम मुडवारा पडा ।

कटनी जिले का उत्तर पूर्र्वी भू-भाग कैमोर पर्वत श्रृखलाओं से घिरा हुआ है जिसमें मुख्यतः विजयराघवगढ़,

बडवारा एवं ढीमरखेडा विकास खण्ड आते हैं । वहां जिले का का दक्षिणी पूर्वी भू-भाग महानदी कटनी के

ढलान वाले बैलीगाटी क्षेत्र में आता है और इसमें कटनी रीठी तथा बहोरीबंद विकास खण्ड आते हैं ।

जिले में जहां बिलहरी को पुष्पावती नगरी कहा जाता है ऐतिहासिक दृष्टि से देखे तो वहां कल्चुरी काल की

पुरासंपदा महल, बावली, विष्णुबाराह, तातसी मठ सहित काम कंदला जैसे अनेक स्थल आज भी मौजूद हैं ।

बहोरीबंद  का  रूपनाथ  आज  भी  सम्राट  अशोक के शिलालेख की स्मृति सजोये राज काज के  तोर 

तरीके  और  मानवता  का  संदेश देता है । ग्राम बड़गांव में मठ स्थापित  है।

विजयराघवगढ़  को  अंग्रेजी हुकूमत  ने  अपने  कब्जे  में लेने  के  बाद १८६५  में  तहसील  का  दर्जा

दिया । इसी  रियासत के  अल्पायु के  राजा   सरयू  प्रसाद  ने  पहले  स्वतंत्रता  संग्राम  में अंग्रेजों का

नाको चने चबवा दिये और काले पानी की सजा होने के बाद जाते समय उन्होंने खुद ही अपनी इहलीला

समाप्त कर ली । विजयराघवगढ में शारदा मां का मंदिर प्राचीन काल से स्थापित जो मैहर की शारदा मां

की बड़ी बहन के रूप में पूजी जाती है ।अंग्रेजी हुकूमत के दौरान ही १९०१ में कटनी को नगर का दर्जा प्राप्त

 हुआ । उस वक्त इस भू-भाग के ऐसे बहुत से नगर और जिले हैं जिन्हें नगर का दर्जा आज से ५० - ६०

 वर्ष पहले मिला । कटनी के जिला न बनने के दुर्भाग्य को वर्ष १९९८ में लगभग ९७ वर्ष बाद म०प्र०

 सरकार ने जिला बनाकर सौभाग्य में बदला यहां पर बडेरा का मंदिर जो कि चार युग को दर्शाता । यहां

 पर माधवशाह बाबा की याद में मेला भरता है जिसमें काफी दूर दराज के सिन्धी समाज के भक्त गण

 आते हैं ।

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